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Unhappy with your Life? Ways to be Always Happy| My Fit Brain

Unhappy with your Life? Ways to be Alway

खुशी क्या है?

ख़ुशी और दुःख मूलरूप से हमारे मन की दशाएं हैं| यह दोनों दशाएं किसी भी बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होती| अगर आसान शब्दों में कहें तो यह भाव मन के अंदर से आते है, बाहर से नहीं| एक ही स्थिति में दो व्यक्ति दो अलग-अलग तरीक़ों से प्रतिक्रिया दिखाते है| उस्सी परिस्थिति में एक व्यक्ति भुत तनाव और परेशान अनुभव कर सकता है, जबकि दूसरा उससे शांतिपूर्वक और प्रसन्ता से निपट सकता है|

इससे यह देखने को मिलता है कि हमारा खुश या दुखी होना, बाहरी परिस्थितियों पर नहीं बल्कि हमारे मन में चल रही प्रतिक्रियाओं पर निर्भर करता है| यह कहना ग़लत होगा कि मानसिक दृष्टिकोण ही जीवन में सब कुछ है| इसलिए सदा खुश रहने के लिए हमें अपने मानसिक दृष्टिकोण को ही व्यवस्थित करना होगा| सुखी और खुश रहने का यही सार है| अपने मानसिक दृष्टिकोण को दोबारा से व्यवस्थित करने के लिए हमें अपना मानसिक बल और इच्छा शक्ति भी बढ़नी होगी|

आइये जानते है खुश रहने के कुछ तरीके;

  • सकारात्मक विचार: हम सब अपने जीवन में सबसे कम महत्व हमारे विचार करने के तरीके जो देतें है| जबकि हमारे चरित्र तथा व्यक्तित्व के निर्माण में यह सबसे महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली है| हमें हर बात य घटना को एक सकारात्मक रूप से देखने की आदत बनानी चाहिए, फिर वो चाहे कितनी भी दुखपूर्ण क्यों न हो| नकारात्मक विचारधारा मनो-मस्तिष्क कमज़ोर बनाता है| जिससे मन बेचैन, उत्तेजित और दूषित हो जाता है| हमें जरूरत है अपने मानसिक रुख और दृष्टिकोण को फिर से व्यवस्थित करे, हर नकारात्मक स्थिति को सकारात्मक रूप में बदल दीजिये| किसी भी व्यक्ति के लिए बुरे विचार अपने मन में न लाईये| अपने विचारों में सकारात्मकता बनाए रखने के लिए, आप भौतिक परिस्थितियों और वातावरण को अपनी ओर आकर्षित करते रहें| सकारात्मक विचारों से पूर्ण रह कर आप अपने चारों ओर रचनात्मक तरंगों का तेज़ पुंज बना लेते है| इससे आपके संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को लाभ होता है| यह सकारात्मक विचारों की तेज़ पुंज दूसरों द्वारा छोड़ी जाने वाली नकारात्मक विचार तरंगों से आपकी रक्षा भी करता है|
  • मौन, एकांत और आत्मनिरीक्षण: प्रतिदिन आपको कुछ समय अपने लये निकलना चाहिए, जिसमे आप कुछ समय एकांत और शांती में रह सकें| इस समय को पूरी तरह से आना रखिए| इस समय में आप खुद को और गहराई से जानने की कोशिश करें| सोचिए किन क्षेत्रों में आपको सुधार करने की जरूत है| किन क्षेत्रों में आप भूल कर रहें है| इस अत्मविशलेषण के आधार पर आत्मसुधार करने के लिए अपने सुझाव दीजिए| मौन रहने से आपको मानसिक शांति का अनुभव होता है| हमेशा कम, धीमा और मधुर बोलिए| फालतू के वाद-विवाद गप्पों में अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति नष्ट न करें| अगर किसी भी वाद-विवाद से क्रोध या तनाव पैदा होने वाला हो तो, उसे तुरंत बंद कर देना ही बुद्धिमानी होगी| यह मत सोचिए कि आपका तर्क बहुत युक्तिसंगत है| बल्कि रचनात्मक विचारों में भाग लें, जिससे आपको कुछ नया ज्ञान मिलेगा| यदि किसी व्यक्ति से आपका मन नहीं मिलता और उससे बातचीत करने का अंत हमेशा गुस्से या झगडे से होता हो तो, जितना हो सके उससे उतनी कम बात करें|
  • भयमुक्त हों: तरह-तरह के भय,हमारी उन्नति और मानसिक शक्तियों को समाप्त करता है| वास्तव में आपको जिस बात का भय करते हैं, आप उन्ही परिस्थितियों और दशाओं को अपनी और आकर्षित करते हैं| कुछ लोग सदा ही डरते रहते है कि कहीं ये न हो जाए, वो न हो जाए| इस प्रकार वे अपने मन को उत्तेजित और परेशान बनाए रखते है| इस संसार में ऐसा कुछ नहीं है जिससे डरने की जरूरत है| अपने डर को हटाने का सबसे अच्छा तरीका है कि उस डर का बार-बार समना करते रहें और मन में विश्वास रखें कि ये चीजों से मुझे कोई नुकसान नहीं है| किसी ने सच कहा है कि आप जितना ज्यादा जिस चीज़ से डरेगे, वो आपको उतना ही डरयागी| यहाँ तक कि भूत प्रेत, कला जादू, मृत आत्माओं द्वारा कष्ठ पहुँचाना और दूसरी पैरा-मनोविज्ञानिक प्रभाव भी केवल उन लोगों पर अपना असर डालते हैं, जो मानसिक रूप से कमज़ोर, डरपोक और इन बातों पर अन्धविश्वास करते है| यह बातें मानसिक रूप से शक्तिशाली लोगों को छू भी नहीं सकती|
  • हीनभाव से दूर रहिए: हमेशा यह याद रखें “जो काम और लोग कर सकते हैं वह आप भी कर सकतें है| कुछ लोगों में हीन भावना होती है| वह सोचते है कि वह कभी कुछ नहीं कर सकतें| उन्हें अपनी योग्यता एवं शक्ति पर कभी विश्वास नहीं होता| यदि आप ध्यान लगाकर कर अपने मन कि शक्ति का पता लगा सकें तो जो चाहे कर सकते है| इस दुनिया में कोई भी निपुण नहीं है| इसलिए कभी भी अपनी तुलना दुसरे से करके खुद को छोटा या बड़ा समझने का विचार अपने मन में कभी न लाइए| बल्कि खुद पर विश्वास रखें कि जो दुसरे कर सकते है आप भी कर सकते है|
  • समय के पाबंद रहें: हम सब जानते है कि हमारे छोटे से जीवन में समय का कितना मूल्यवान है| इसलिए हमें अपना इतना मूल्यवान समय बरबाद नहीं करना चाहिए| समय बहुत ही तेज़ी से दौड़ता है| हर क्षण हम अपनी मृत्यु के और नजदीक पहुँच रहे है| मृत्यु के लिए सब बराबर है; चाहे गरीब हो या अमीर, शक्तिशाली हो या कमज़ोर| मृत्यु किसी भी क्षण बिना बताये आ सकती है| हमें थोड़े से थोड़े समय में ज्यादा काम करना चाहिए| अपने समय को बेकार के विचारों, गप-शप या इधर-उधर कि बातों में व्यर्थ न करें| एक बार समय निकल गया तो कभी वापिस नहीं आयेगा| इसलिए हमेशा किसी उपयोगी रचनात्मक कार्य में व्यस्त रहिए|
  • अपनी कमजोरियों को स्वीकारें: अपनी कमजोरीयों को स्वीकार करने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए| अपनी कमजोरियों को कभी छुपाना नहीं चाहिए| एक बार आप अपनी कमजोरियों को समझ ले जान ले, तभी आप उनको दूर करने के लिए पहला कदम उठा पाएगा| कमजोरी हर इंसान में होती है| यह स्वाभाविक है; बस अपनी कमजोरियों को  स्वीकारना आवश्यक है| इंसान अपनी गलतियों से ही सीखता है| अपनी गलतियों को स्वीकार कर, जान कर उन्हें दूर करना अति महत्वपूर्ण है| कभी भी यह मत सोचे कि आपकी गलतियाँ जान कर सामने वाला आपको छोटा समझेगा| हमेशा याद रखें कि, सामने वाला वास्तव में, आपकी योग्यता और शक्ति से आपको कम ही समझें| इससे आपको लोगों के सामने अपने स्तर को सिद्ध करने के लिए कोई बनावटी जोर नहीं देना पड़ेगा| अपने आप को अपनी आँखों से देखना सीखें, दूसरों कि आँखों से नहीं|

किसी भी प्रकार कि सहायता के लिए हमारे काउंसलर या साइकोलोजिस्ट से ऑनलाइन www.myfitbrain.in पर अपॉइंटमेंट के माध्यम से संपर्क करें|


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