Fundamental Legal Rights | Some Important Legal Rights of the Citizens | My Fit Brain

LATEST BLOG

Latest Blogs By Mental Health Professionals.

Some Important Legal Rights | Legal Consultancy | My Fit Brain

भारत सरकार ने हर एक नागरिक को कानूनी रूप से अनेक अधिकार प्रदान किए हैं, जिनकी जानकारी होना जरुरी है| नीचे कुछ महत्वपूर्ण कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गयी है|

  • भारत के कानून में नागरिक को सम्मान सहित जीवन-यापन करने का अधिकार है| हर एक नागरिक को बिना किसी भेदभाव के समान रूप से कानूनी संरक्षण दिया गया है| हर एक नागरिक को आजीविका कमाने का अधिकार है|
  • लोकहित से जुड़े मामलों के लिए कोई भी नागरिक उच्चतम न्यायालय में अपनी शिकायत लिखित रूप में डाक द्वारा भेज सकता है|
  • यदि ज़मानत के मामले में व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, तो वह जमानतीय अधिकार की मांग कर सकता है| इसके लिए ज़मानत पर छूटने का कानूनी प्रावधान है|
  • सार्वजनिक स्थानों पर अवरोध के खिलाफ़ कोई भी नागरिक कार्यकारी मजिस्ट्रेट व जिला मजिस्ट्रेट के पास परिवेदन दर्ज करवा सकता है|
  • हर एक व्यक्ति को अपने जीवन की रक्षा का अधिकार है, स्वयं का जीवन बचाने के लिए व्यक्ति को हमलावर या हमलावरों के खिलाफ़ संघर्ष करने का विधिक अधिकार दिया गया है|
  • अपने साथ हुए जुल्म, अन्याय और अधिकार समाप्ति के खिलाफ व्यक्ति को पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ.आई.आर.) दर्ज करवाने का कानूनी अधिकार है|
  • गिरफ्तार किया गया व्यक्ति न्यायिक साक्ष्य के लिए अपना शारीरिक परिक्षण करवा सकता है|
  • कानूनी सहायता के विधिक हक़दार नागरिकों को अपनी सुरक्षा के लिए निशुल्क वकील की सेवाएं सरकारी खर्च पर प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है|
  • कानून में हर एक नागरिक को न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अधिकार दिया गया है|
  • अधिकार शोषण के खिलाफ व्यक्ति न्यालयालय में परिवाद दायर कर सकता है|
  • पुलिस द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज न करने पर व्यक्ति, पुलिस अधीक्षक या अन्य सीनियर, पुलिस अफसर को पत्र द्वारा अपराध की ख़बर देकर एफ.आई.आर. दर्ज करवा सकता है|
  • किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए दो बार दण्ड नहीं दिया जा सकता, यदि अपराध दोहराया न गया हो|
  • पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को चौबीस घंटों से अधिक अवधि तक गिरफ्तार करके नहीं रख सकती|
  • पुलिस द्वारा गिरफ्तार व्यक्ति यदि चौबीस घंटों में न्यायाधीश के सामने पेश नहीं किया जाता, तो वह अपनी रिहाई के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट का प्रयोग कर सकता है|
  • व्यक्ति से उसकी मर्ज़ी के खिलाफ़ कोई भी कार्य नहीं करवाया जा सकता, चाहे मजदूरी दे दी गयी हो|
  • जेल में बंद कैदियों को भी कार्य के बदले मजदूरी दिए जाने का प्रावधान है, जो उसे रिहाई के समय दे दी जाती है|
  • जेल मैन्युअल के अनुसार, कैदी प्रत्येक मंगलवार या गुरुवार को दो व्यक्तियों से मुलाकात कर सकता है| वकील या वकीलों से मिलने के संबंध में उन्हें यह अधिकार है कि वह जब चाहें और जितनी बार चाहें अपने मुवक्किल (कैदी) से मिल सकते है|
  • अपराधी के कारावास की सज़ा होने पर वह न्यायालय के फैसले की कॉपी निशुल्क प्राप्त कर सकता है|
  • हर एक व्यक्ति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह अपनी वजहों को जान सकें|
  • प्राणदंड के खिलाफ यदि अनुज्ञात समय में अपील की गई है, तो प्राणदंड की अपील को निरपराध होने तक स्थगित रखे जाने का प्रावधान है|
  • हर एक व्यक्ति को एफ.आई.आर. की निशुल्क प्राप्त करने का विधिक अधिकार प्राप्त है|
  • गर्भवती स्त्री को प्राणदंड नहीं दिया जा सकता| इसके लिए दंडादेश को स्थगित करवाने का अधिकार दिया गया है|
  • स्त्री धन को प्रत्येक कुर्की एवं नीलामी से मुक्त रखा गया है|
  • उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार एफ.आई.आर. दर्ज हो, जिस क्षेत्र में वारदात हुई हो| यदि पुलिस अधिकारी द्वारा आनाकानी की जाती है, तो इसकी लिखित शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों को दी जा सकती है|
  •  नाबालिक व्यक्ति द्वारा की गई संविदा के लिए उससे ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता|
  • विधवा बहू को अपने ससुर की अर्जित सम्पत्ति का जायज अधिकारी माना गया है|
  • फौजदारी धारा 47 के अनुसार, स्त्री कैदी से पूछताछ एवं तलाशी का कार्य स्त्री द्वारा ही या स्त्री की मौजूदगी में ही किया जा सकता है|
  • 7 साल से कम उम्र के बालक द्वारा किया गया कार्य जुर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता|
  • गिरफ्तार व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह अपनी गिरफ़्तारी की ख़बर अपने पारिवारिक सदस्यों, मित्रों, रिश्तेदारों व वकील को कर सके|
  • हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के अनुसार, पति द्वारा अर्जित धन-सम्पत्ति पर पत्नी व उसके बच्चों को आधी आय व सम्पत्ति का अधिकार दिया गया है|
  • हर एक व्यक्ति को अपनी धन सम्पत्ति का उतराधिकारी तय करने का अधिकार है|
  • चौदह वर्ष से कम उम्र के बालकों को फर्म/फैक्ट्री में कार्य पर नहीं रखा जा सकता|
  • पति पर पत्नी के खिलाफ एवं पत्नी पर पति के खिलाफ वैवाहिक स्थिति के दौरान की प्राइवेट बातों के लिए गवाही देने पर दबाव नहीं डाला जा सकता| इसी प्रकार अपने की मामले में व्यक्ति पर स्वयं के विरुद्ध गवाही व सुबूत पेश करने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता|
  • स्त्रियों या बालकों से अनैतिक काम करवाना दण्डनीय अपराध है| उसने ज़बर्दस्ती भीख मंगवाना या वेश्यावृत्ति करवाना अपराध है|
  • किसी भी व्यक्ति को गुलाम बनाकर नहीं रखा जा सकता|
  • कारखाना अधिनियम, 1948 के अनुसार, हरएक मजदूर को कानून द्वारा निर्धारित की गई सुविधाएं पाने का अधिकार है| वह सुविधाएं निम्नलिखित हैं-
  • हरएक व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह अपनी गैरहाजरी में कार्यवाही के लिए प्रतिनिधि नियुक्त कर सकें|
  • जिस फर्म में 500 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं, वहाँ एक श्रम कल्याण अधिकारी की फर्म-मालिक द्वारा नियुक्ति की जाएगी और वही उसका वेतन भी देगा|
  • फर्म में फर्स्ट एंड बॉक्स होना चाहिए| 500 से अधिक कर्मचारी होने पर डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ के साथ चिकित्सा कक्ष भी होना चाहिए|
  • जिन फिर्मों की क्षमता 250 कर्मचारियों से अधिक है वहां जलपानगृह की सुविधा होनी चाहिए|
  • कर्मचारी यदि 150 से अधिक है, तो उनकी सुविधा के लिए विश्राम कक्ष, आराम कक्ष व भोजनालय की व्यवस्था होनी चाहिए|
  • जहाँ कर्मचारी खड़े होकर कार्य करते हैं, वहां कर्मचारियों के बैठने की उचित वयवस्था होनी चाहिए|
  • पुरुष तथा स्त्री कर्मचारियों के लिए अलग-अलग कपडे धोने की वयवस्था होनी चाहिए| गीले कपड़ो को सुखाने की भी वयवस्था मालिक की ओर से की जानी चाहिए|
  • कारखाना अधिनियम, 1948 के अनुसार, कारखानों में ३० से अधिक स्त्री कर्मचारी होने पर उनके 6 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए शिशुघर होने चाहिए| शिशुघर की देख रेख के लिए कुशल प्रशिक्षित स्त्री होनी चाहिए|
  • स्त्री कर्मचारियों से एक दिन में 9 घंटे से ज्यादा काम नही लिया जा सकता|
  • शाम 7 बजे से सुबह 5 बजे तक महिला कर्मचारी को काम पर नहीं लगाया जा सकता|
  • एक सप्ताह में 48 घंटों से ज्यादा काम नहीं करवाया जा सकता| सप्ताह में 6 दिन काम के व एक दिन छुट्टी का होगा|
  • 16 साल से कम उम्र के किशोर, जन्हें प्राणदंड या आजीवन की सज़ा सुनाई गई है, उन्हें न्यायालय द्वारा बालक अधिनियम, 1960 के अनुसार, पुनर्वास, प्रशिक्षण एवं उपचार के अधिकार प्रदान किए गए है|
  • समाज कल्याण विभाग द्वारा अनाथ तथा त्यागे हुए 5 साल तक के बच्चों के लिए शिशुघर की स्थपना की गई है| 6 से 16 साल से बालक एवं किशोर तथा 6 साल से 18 साल तक की बालिका एवं किशोरी के लिए निराश्रित बालघर की स्थापना की गई है| दोनों प्रकार की योजनायों द्वारा निम्न सुविधायुक्त अधिकायुक्त अधिकार दिए गए हैं-
  • भोजन की उचित वयवस्था का लाभ|
  • कपड़े प्राप्त करने की अधिकारिकता|
  • जीवनोपयोगी शिक्षा प्राप्त करने का प्रावधान|
  • समाज कल्याण की उपर्युक्त योजनाओं का लाभ निम्न प्रकार के शिशु, बालक-बालिकाओं को दिया जाता है-
  • पिता द्वारा माता को त्याग दिया गया हो और माता पालन पोषण करने में समर्थ न हो|
  • जिनके माता-पिता को लम्बी कारावास की सज़ा दी गई हो|
  • बालक अनाथ हो या जिसके माता-पिता के बारे में कोई जानकारी न हो|
  • कोढ़ की बीमारी के कारण माता-पिता द्वारा जिन बच्चों की देखभाल किया जाना असंभव हो|
  • हर एक व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह अपनी गैरहाजरी में कार्यवाही के लिए प्रतिनिधि नियुक्त कर सकें|

किसी भी प्रकार की सहायता के लिए हमारे लीगल कंसलटेंट (Legal Counsultant) ऑनलाइन www.myfitbrain.in पर संपर्क करें|


Share:

Meet Our Therapists

Dr Neha Mehta

Dr Neha Mehta

Consultant Psychologist, Menta

Available For
Consultation (Clinic)Voice CallVideo (Skype) CallChat

Counseling Starts From
1000 / 30 Minutes

Dr Abhishek Chugh

Dr Abhishek Chugh

Psychiatrist, Neuro Psychiatri

Available For
Chat Voice CallVideo (Skype) Call

Counseling Starts From
1200 / 30 Minutes

Tanishka Pathak

Tanishka Pathak

Counselor, Counseling Psycholo

Available For
Chat Voice CallVideo (Skype) Call

Counseling Starts From
2000 / 30 Minutes

Talk to Experts

Choose your Expert & Book a Session

Online Therapists →