Some Ways to be Happy | My Fit Brain | Happiness Therapy

Gayathri Pillai
Happiness

28 Nov 2020
Some Ways to be Happy | My Fit Brain | Happiness Therapy

खुश रहने के तरीके

सोचिए कम, करिए ज्यादा

कुछ लोग विचार करने में ही बहुत-सा समय नष्ट कर देते है| वे लोग अपनी कल्पना की दुनिया में लीन रहते है| ये लोग वास्तव में बहुत कुछ सीखना तथा हासिल करना चाहते है, पर वह ऐसा नहीं कर पाते क्योंकि उनका तरीका ग़लत होता है| वह जो चाहते है, वह न मिलने की वजह से हर समय निराशा और डिप्रेशन में रहते हैं| ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनका काफ़ी समय विचार करने में ही गुज़र जाता है| और जब वह कोई कार्य करते है तब उनका मन उन पे हावी होने लगता है, और वह अपना कार्य ठीक से मन लगाकर नहीं कर पाते| किसी कार्य को अच्छे से करने के लिए उस पर विचार विमर्श करना बहेतर है, परन्तु दिन भर उसके बारे में लगातार सोचना हानिकारक है| कभी भी किसी कार्य के बारे म अधिक समय तक नहीं सोचना चाहिए| ऐसे अवसरों पर हमेशा अपने कार्यों की लम्बी सूची में से कोई काम निकाल कर कर लेना चाहिए| कम-से-कम समय में कोई भी काम सिखने या करने की इच्छा से निराशा उत्तपन होती है| हम सब जानते है कि समय के साथ-साथ हमारी इच्छाएं भी बदलती है| आपको ख़ुशी पाने के लिए किसी आने वाले समय का इंतज़ार करने की आवश्यकता नहीं है कि कब अपकी सारी योजनाएं पूरी होंगी| इसीलिए वर्तमान क्षण में रहना और उसी में ख़ुशी ढूँढना बेहतर है|

शिकायत और कलह न करें

कुछ लोगों को लगातार, हर छोटी-छोटी बातों पर शिकायतें और कलह करने की आदत होती है| जैसे: “यह काम ठीक से नहीं हुआ”, “मुझे यह बात बिलकुल पसंद नहीं”, “मुझे यह अच्छा नहीं लगता”, “उसने मुझसे पुचा नहीं”, ऐसे कथनों की सूची कभी खत्म नही होगी| ऐसे व्यकियों को थैला हमेशा शिकायतों से भरा रहता है| उनका ध्यान कभी भी सही तरीके से किए गए कार्यों पर नहीं जाता| उनके ज़हन से अच्छी बातें और कार्य बहुत जल्दी उतर जाते है| वह जीवन में हमेशा नकारात्मक बातों पर ध्यान देते है| अपने इसी दृष्टीकोण के कारण वे हमेशा तनाव में रहते हैं| कोई भी मानव अपने आप में पूर्ण नहीं है, इसलिए हमें गुस्से में आकर हमेशा शिकायतें नहीं करनी चाहिए| हमें अपना दृष्टीकोण और प्रतिक्रियाओं में परिवर्तन लाना चाहिए| दुसरे व्यक्ति द्वारा की जाने वाले हर अच्छे कार्य को सहराना चाहिए| यदि आपको किसी को उसकी कमियाँ बतानी भी है तो सकारात्मक तरीके से बताए, जिससे उन्हें भी बुरा न लगे| इस संबंध में कभी भी भावनात्मक दृष्टिकोण न अपनाएं|

हमेशा अपना एक लक्ष्य रखें

जीवन बहुत मूल्यवान है| यह जीवन हमें बेकार और बिना किसी उदेश्य के बर्बाद नहीं करना चाहिए| परन्तु कुछ लोग अपना जीवन ऐसे ही व्यतीत करते है, मानों जो कम मिल जाए उसमें उन्हें अपनी ज़िंदगी को काटना है| ऐसा प्रतीत होता है जैसे उनका मकसद बस एक दिन जैसे-तैसे मर जाना है| आपको अपने व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन के लिए छोटी और बड़ी अवधि के लक्ष्य बनाने चाहिए और उन्हें प्राप्त करने के लिए एक एक कदम आगे बढ़ाना चाहिए| एक दिशाहीन मन अपनी निम्न प्रवृति के सामने हार मान जाता है और हर प्रकार की पाशविक वृत्तियों और दुर्गुणों का शिकार बन जाता है|

हरएक दिन का आनंद लेकर जिए

हमें केवल आज में हंसी-ख़ुशी जीना चाहिए| बीते हुए कल और आने वाले कल दोनों को भूल जाना चाहिए| तब आपके पास सिर्फ एक ही दिन कि समस्याएं होंगी, और वह बहुत आसानी से हल हो जाएगी| अपने जीवन को छोटी-छोटी इकाइयों में बांट कर और भूत और भविष्य की चिंताओं से मुक्त होकर आप अपने वर्तमान काम पर पूरा मन लगा सकतें है और उसे ख़ुशी से जिए, क्योंकि जब आपका मन एक समय में भूत और भविष्य दोनों में घूमता है तो आपका वर्तमान कार्य को अच्छे से नहीं कर पाते| आप अपने दिन को घंटों और मिनटों में भी बांट सकते है और फिर सब कुछ भूल कर एक-एक क्षण को जी सकते हैं और उसे ख़ुशी से जिये| यही सफल लोगों के जीवन की कुंजी है|

स्वस्थ मन के लिए सात्विक भोजन

आपका भोजन आपके मन पर बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है| चाय, कॉफ़ी, शराब, सिगरेट, कोकोला, तली हुई चीज़े, मिर्च-मसाले, मिठाईयां, बहुत गर्म या बहुत ठंडी खाने-पीने की चीजें अदि मन पर बहुत प्रभाव डालता है| ये मस्तिष्क के संतुलन को बिगाड़ देते है| इसी भांति अधिक भोजन करना अथवा थोड़ी-थोड़ी देर बाद कुछ-न-कुछ खाते रहना भी शरीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है| अच्छा स्वास्थ्य का एक रहस्य सदैव थोड़ा भूखा रहना है| अपने मन को शुद्ध रखने और आंतरिक अंगों की सफ़ाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीजिए, सब्जियां तथा फल खाइए| अपने स्वास्थ्य और मन पर नियंत्रण पाने के लिए कभी-कभी व्रत रखना बहुत अच्छा है| यह भी महत्वपूर्ण है कि आप जब तनाव में हों, तो भोजन न करें| जल्दबाजी में भोजन न करें| ऐसी अवस्था में भोजन ठीक से पचता नहीं, परिणामस्वरूप ज़हर-सा बन जाता है| भोजन सदैव शांत मन से करें| यदि ऐसा संभव न हो, तो भोजन करने को टाल जाएं|

अच्छी संगति चुनिए

अपनी संगति और मित्रों का चुनाव सावधानी से करिए, क्योंकि संगति का असर आपके विचारों पर बहुत प्रभाव है| इसलिए दुर्गुणों से युक्त लोगों, अविकसित मन वाले लोगों और भौतिकवादी दृष्टिकोण रखने वाले व्यक्तियों की संगत से बचिए| आप मित्र उन्हें बनाइये जिनको आप एक लम्बे समय तक परख चुके हों और जिनसे आपका मन मिलता हो| बार-बार दोस्ती तोडना एक कमजोर और अविकसित मन का सूचक होता है| इसीलिए एक बार मित्रता करने के बाद उसे स्थायी मित्रता रखने का प्रयत्न करिए|

दुसरों से आशाएं मत करिए

किसी से भी आशा या अपेक्षा मत रखिए| आपको यह नहीं सोचना चाहिए कि अपने किसी की सहायता की है तो उसे भी कम-से-कम इतना तो करना चाहिए|    ध्यान रखिए किसी की सहायता करके आप उस पर कोई अहसान नहीं कर रहें है| आप केवल परमात्मा का कार्य कर रहे है और इस अच्छे काम के द्वारा अपने को पवित्र और ऊँचा बना कर आप मूल रूप से अपनी सहायता कर रहे है| किसी को दी गई सहायता के बदले जैसे ही उसके बदले में कुछ पाने का विचार आपके मन में आता है, आप इस शुद्ध कार्य को एक व्यापारिक लेन-देन में बदल देते हैं, और आपके कार्य से संलग्न आदर्श ही समाप्त हो जाता है| यदि कोई आपकी सहायता के बदले में उचित उत्तर नहीं देता, तो उसके प्रति कोई बुरी भावना मत रखिए, निष्पक्ष रहिए| यदि कोई आपकी सहायता को मान्यता देता है तो उसके प्रति कृतज्ञ होईए| इसके अलावा यदि आप अपने अच्छे कार्य के लिए कोई पुरस्कार या सहायता चाहते हैं तो वह आपको परमात्मा से मांगनी चाहिए उस व्यक्ति से नहीं| हमेशा याद रखिये हमारे द्वारा किया गया कोई भी अच्छा कार्य कभी बेकार नहीं जाता| वह हमारे पास उचित रूप से किसी-न-किसी समय में पुरस्कृत होकर वापिस आता है|

लालच मत कीजिए

हमें किसी भी चीज़ पर यह घमंड नहीं करना चाहिए के ये सिर्फ हमारा है| कुछ लोग किसी भी वस्तु को अपना होने का दावा करते है, वह यह भूल जाते है कि वह वस्तु आपको अपने लक्ष्य प्रप्त करने के लिए साधन के रूप में मिली है, कभी-न-कभी ये चीज़े एक-एक करके आपसे ले ली जाएगी| यह बात हम सभी को अच्चे से समझ लेनी चाहिए कि सांसारिक वस्तुएं और धन हमें विकास में सिर्फ एक साधन और सेवक की भूमिका निभातें है| पर दुर्भाग्यवश हम इन वस्तुओं को अपना मालिक समझ लेते है, और खुद इनके नौकर बन जाते है| हमारी इसी दृष्टीकोण की वजह से हमारे विकास पर हम खुद ही रोक लगी है| यदि इस सांसारिक उलझनों से निकलना चाहते हैं तो इस बात को अच्छे से समझ लें कि कोई भ वस्तु तथा सम्पत्ति पर आपका कोई हक़ नहीं है इसलिए हमे किसी भी वस्तु या सम्पत्ति का लालच नहीं करना चाहिए|

टालने की आदत से बचिए

“कल करे सो आज कर, आज करें सो अब” हम सभी ने इन पक्तियों से परिचित है| हमें किसी भी काम को कल पर टालने की आदत से बचना चाहिए| जो व्यक्ति अपनी कुर्सी से उठ कर तत्काल कार्य करते है, वही सफल होते है| किसी भी काम को शुरू करने का सही समय बस यही है, कल नहीं| इस संसार में जितनी भी महँ चीज़े या कार्य हुए हैं, वे ऐसे लोगों ने किए है जो “आज” पर बल देते है| केवल बात करना और कार्यों को दिन-प्रतिदिन लटकाए रखना असफलता की और जाने का निश्चित सकेंत है, इसीलिए आलस्य को त्याग कार्य शुरू कर देना चाहिए|

हर परिस्थिति से शिक्षा लें

आज मानव जीवन ऐसा हो गया है की आपको समय-समय पर विभिन्न परिस्थितियों को सामना करना होगा, उनसे अलग-अलग तरह की शिक्षा लेकर विकास की और बढ़ना होगा| जीवन में परिस्थितियों और अवसरों की कमी नहीं है| प्रतियेक अवसर आपके लिए एक नया अनुभव लाता है| सभी परिस्थितियां भिन्न होती है| हर एक पल दुसरे पल से बिलकुल अलग होता है| जीवन में बहुत से घुमाव आते है| कोई भी व्यक्ति सदैव एक जैसा जैसा जीवन नहीं जी सकता| हमारा काम हर अनुभव का लाभ उठाना है| कोई भी अवसर कितना भी छोटा या महत्वहीन हो कुछ-न-कुछ जरुर सिखाता है| बस हमें अपना मन शिक्षा ग्रहण करने के लिए खुला रखना चाहिए| जीवन की प्रत्येक स्थिति के साथ एक कलाकृति की तरह व्यवहार करिए| किसी भी स्थिति को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए|

किसी भी स्थिति में आपको सहायता की जरूरत को तो हमे www.myfitbrain.in पर ऑनलाइन संपर्क करें| हमें आपकी सहयता करने में बेहद ख़ुशी होगी|

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    Gayathri Pillai

    Happiness Coach, Naturopathist

    Location: N/A

    Language: English, Hindi

    Area Of Expertise: Self Improvement, Physical Health, Nutrition, AMIT VERMA, Naturopathy, Adolescent Counselling, TeenAge Problems

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